Pehchan
Stories - Thriller Story

Pehchan- 1

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मां रोज की तरह आज भी चाय और ब्रेड की दोस्त बनाकर डाइनिंग टेबल पर रखती है और आवाज लगाती है, रिया-रिया नाश्ता तैयार है बेटा जल्दी आ वरना ठंडा हो जाएगा। रिया अपने कमरे में तैयार हो रही होती है मां की आवाज सुनकर वह आवाज लगाती है आई बस थोड़ी देर ओर, और तैयार होकर नीचे चली जाती है। नीचे जाकर अपनी मां के साथ बैठकर नाश्ता करने लगती है। इतने में ही रिया का फोन आ जाता है और वह फोन उठाकर कहती है हां हां बस आती हूं और जाने लगती है। इतने में मां उसे रोकते बोलती है अरे बेटा नाश्ता तो कर ले। तब रिया होने बोलती है नहीं मां प्लीज मैं ऑफिस में कर लूंगी मैं लेट हो रही हूं और भागते हुए अपने मां को गले लगा कर उन्हें बाय बोलकर ऑफिस चली जाती है।
 
रिया जैसे ही ऑफिस में पहुंचती है तो उसका मेनेजर उसे चिल्लाने लगता है। रिया जानती हो तुमने कितनी इंपॉर्टेंट मीटिंग मिस कर दी है। रिया मैनेजर को सॉरी भी बोलती है लेकिन मैनेजर उसे बोलता है रिया इस बार सिर्फ सॉरी से काम नहीं चलेगा। बॉस ने तुम्हें डिसमिस कर दिया है और इस बार मैं भी तुम्हें बचा नहीं सकता। रिया दुखी हो जाती है और वहां से जाने लगती है।
 
जॉब छूट जाने की वजह से रिया काफी अपसेट होती है वह अपनी स्कूटी पर बैठती है और अपनी फ्रेंड शिवानी के घर चली जाती है। शिवानी जैसे ही रिया को दुखी देखती है तो उससे पूछती है रिया क्या बात है। तब रिया उसे सारी बातें बता देती है। तब शिवानी उसे समझाती है कि तू चिंता मत कर सब ठीक हो जाएगा। तब रिया उसे रोते हुए बताती है कि उसका घर उसकी सैलरी पर ही चलता है और कहती है मैं यह सब मां को कैसे बताऊंगी। और जोर जोर से रोने लगती है। तब शिवानी उसे गले लगा लेती है। शिवानी के घर बैठे हुए शाम के 5:00 कैसे बन जाते हैं उसे पता ही नहीं चलता। रिया शिवानी से कहती है अब मुझे चलना चाहिए नहीं तो मां परेशान होगी और उसे बाय कर कर घर चली जाती है।
 
इधर घर पर रिया की मां यह सोच सोच कर परेशान हो रही होती है कि शाम के 6:00 बज गए हैं और यह अभी तक घर नहीं आई हैं। वह रिया का फोन भी ट्राई करती है लेकिन उसका फोन नहीं लगता है। तब वह और ज्यादा परेशान हो जाती हैं और फिर शिवानी को कॉल करती हैं और उससे रिया के बारे में पूछती है।तब शिवानी उन्हें सारी बातें बता देती है और कहती है कि रिया तो यहां से 5:00 बजे ही चली गई थी। वह रिया की मां से कहती है आंटी आप परेशान मत हो मैं ट्राई करती हूं उसका फोन और फोन कट कर देती है।
 
शिवानी उन्हें सारी बातें बता देती है और कहती है कि रिया तो यहां से 5:00 बजे ही चली गई थी। वह रिया की मां से कहती है आंटी आप परेशान मत हो मैं ट्राई करती हूं उसका फोन और फोन कट कर देती है।
 
और इतने में  बादल गरजने लगते हैं और आंधी तूफान आने लगता है। रिया की मां बहुत ज्यादा परेशान हो जाते हैं और फिर वह रिया को ढूंढने के लिए बाहर निकल जाती है। काफी देर तक उसे बाहर ढूंढने के बाद भी जब रिया नहीं मिलती है तो वह घर वापस आती है। पर जैसे ही वह देखती है की घर का दरवाजा अंदर से लगा हुआ है उनकी टेंशन कम हो जाती है। क्योंकि उन्हें यकीन हो जाता है की रिया घर आ चुकी है और वह बेल बजाने लग जाती है। थोड़ी देर बाद रिया दरवाजा खोलती है तो देखती है उसकी मां के साथ कोई लड़का भी है और दोनों काफी ज्यादा भीगे हुए हैं। रिया की मां उसे चिल्लाती है तुम कहां थी। पता है में कितना परेशान हो गई थी। मैंने तुम्हें कहां कहां नहीं ढूंढा। तब रिया उन्हें बोलती है यह सब बाते छोड़ो मां यह बताइए यह कौन है?  तब उसकी मां उसे कहती है यह अमन है। इस शहर में नया आया है बेचारा बारिश में भीग रहा था तो मैं अपने साथ ले आई। 
 
रिया उसकी मां को साइड में लेकर जाती है और कहती है यह क्या मां किसी भी अनजान को आप अपने साथ घर ले आई क्या आप यह भूल गई हैं कि घर में सिर्फ हम दो लेडिस ही रहती हैं तब उसकी मां से कहती है हां मैं जानती हूं मगर एक ही रात की तो बात है सुबह होते ही चला जाएगा बेचारा। अमन यह सारी बातें सुन रहा होता है वह उनके पास आकर बोलता है रहने दीजिए आंटी में यहां से चला जाता हूं तब रिया की मां उसे बोलती है नहीं बेटा इतनी बारिश में कहां जाओगे तुम। लेकिन अमन होने बोलता है कोई बात नहीं और जाने लगता है तब रिया उसे रोक लेती है और कहती है कोई बात नहीं आप आज यहां रह सकते हो और यह कहकर अपने कमरे में चली जाती है


अगले दिन सुबह रिया रोज की तरह अलार्म की आवाज से उठती है वो जैसे ही टाइम देखती है कि सुबह के 8:00 बज गए हैं वह जल्दी-जल्दी बेड से उठने लगती है तभी उसे अचानक से याद आता है की उसकी जॉब तो जा चुकी है और वह फिर उदास हो जाती है और जाकर खिड़की के पास बैठ जाती है वह वहां बैठे-बैठे उदास हो कर बाहर हो रही बारिश को देख कर कुछ सोच रही होती है कुछ देर ऐसे ही शांत बैठे रहने के बाद रिया उठ कर नीचे जाने लगती है रिया जैसे ही अपनी मां के कमरे में जाती है तो देखती है उसकी मां भी ऐसे ही उदास होकर खिड़की के पास बैठी हुई है वह उनके पास जाकर पूछती है क्या हुआ मां? तब उसकी मां उसे कहती है यह सावन हर बार आता है लेकिन हमारे जीवन में लगी हुई आग को कभी नहीं बुझा पाता है। उनकी बातें सुनकर रिया उन्हें समझाती है क्या मां आप हर बार की तरह उदास हो रही हो आपके पास में हूं और मेरे पास आप है यही बहुत है बस और कुछ नहीं चाहिए जिंदगी से।


To Be Continued……

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