betiiyaan
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Betiyaan Part – 1

Betiyaan Part – 1

 
 
अमन और किरण दोनों साथ में खेल रहे होते हैं और भागते हुए गलती से किरण के हाथों अमन को धक्का लग जाता है और अमर नीचे गिर जाता है। वह जोर जोर से रोने लगता है तभी उसकी दादी (शारदा देवी) दौड़कर उसके पास आती है और उससे पूछती है क्या हुआ बेटा। अमन किरण की तरफ इशारा कर देता है। शारदा देवी को बहुत ज्यादा गुस्सा आ जाता है वह किरण का हाथ जोर से पकड़कर उसे चिल्लाती है। दिखाई नहीं देता क्या तुझे? खबरदार अगर फिर कभी मेरे पोते के आस-पास भी नजर आई तो। इतने में पीछे से अमन की मां (आरती) आ जाती है बस कीजिये मम्मी जी। और किरण को प्यार से बोलती है बेटा आप बाहर जाकर खेलो।
 
किरण के जाने के बाद आरती अपनी सास से पूछती है मम्मी जी आप हमेशा उस बच्ची को क्यों डांटती रहती हैं। तब शारदा देवी उसे बोलते हैं मैं नहीं चाहती कि इसका मनहूस साया भी मेरे पोते पर पड़े। तब आरती उन्हें बोलती है आप ऐसा सोच भी कैसे सकती हैं अगर इसकी जगह आप की पोती होती तो। शारदा देवी उसे चिल्ला देती है खबरदार जो ऐसा सोचा भी मुझे सिर्फ पोता चाहिए पोता और अमन को लेकर वहां से चली जाती है। आरती कुछ देर वहां खड़ी रहती है और अपनी सास की बात सुनकर उदास हो जाते हैं और अपने पेट पर हाथ रखते हुए कहती अगर सच में तुम एक लड़की हुई तो मैं क्या करूंगी
 
 
अगले दिन आरती किचन में काम कर रही होती है इतने में पीछे से शारदा देवी उसे चिल्लाती है चाय बनी या नहीं। तब आरती उन्हें बोलती जी मम्मी जी बस ला रही हूं। और चाय लेकर उनके पास जाती हैं। जैसे ही वह चाय की प्लेट टेबल पर रख दी है उसे उल्टी आने लगती है और वह अपने रूम में भाग जाती है। 
 
 
थोड़ी देर बाद आरती अपने कमरे से बाहर निकलकर काम करने के लिए जा रही होती है तो उसे शारदा देवी रोक लेती है और उसके पेट की तरफ इशारा करके पूछती है कब से। तब आरती शरमाते हुए बताती है बस कुछ ही दिन हुए है। उसकी बात सुनकर शारदा देवी बहुत खुश हो जाती है और हाथ जोड़कर कहती है- हे प्रभु तेरा लाख-लाख धन्यवाद! इस घर में फिर से एक पोते की किलकारियां गूंजेगी। आरती उनकी बात सुनकर बोलती है मम्मी जी अगर बेटी हुई तो। तब शारदा देवी उसे चिल्ला देती है। एक बात अच्छी तरह समझ ले इस घर में ना ही कभी किसी बेटी ने जन्म लिया है और ना ही कभी ऐसा होगा। आरती को उनकी बात सुनकर रोना आ जाता है और वह अपने कमरे में भाग जाती हैं और अपने कमरे का दरवाजा बंद करके जोर जोर से रोने लगती है।
 
 

मम्मी जी अगर बेटी हुई तो। तब शारदा देवी उसे चिल्ला देती है। एक बात अच्छी तरह समझ ले इस घर में ना ही कभी किसी बेटी ने जन्म लिया है और ना ही कभी ऐसा होगा। आरती को उनकी बात सुनकर रोना आ जाता है और वह अपने कमरे में भाग जाती हैं और अपने कमरे का दरवाजा बंद करके जोर जोर से रोने लगती है।

रवि खुश होकर अपने कमरे में इंटर करता है वह देखता है आरती कबर में कपड़े रख रही होती है। वह खुश होकर आरती को गले लगा लेता है और पूछता है क्या माँ ने जो कहा क्या वह सच है? आरती उदास होकर है में सर हिलती हैं। रवि उसे बोलता मैं बता नहीं सकता कि आज मैं कितना खुश हूं। आरती उदास होकर वापस अलमारी में कपड़े रखने लगती है। रवि उससे पूछता है क्या बात है आरती तुम इतनी उदास क्यों हो? क्या तुम खुश नहीं हो? तब आरती उसे बोलती है। मम्मी जी  को सिर्फ बेटा चाहिए पर मैं तो बेटी चाहती हूं। 
 
तब रवि उसे बोलता है अगर मैं ऐसा बोल रही है तो क्या गलत कह रही है। वैसे भी बेटे भी खानदान का नाम रोशन करते हैं। हमारा वंश आगे बढ़ाते हैं। हमें दुनिया की सारी खुशियां देते हैं और  बेटियों को तो सिर्फ हमें देना ही पड़ता है। आरती उसे बोलती है लेकिन? पर रवि को गुस्सा आ जाता है बस और कुछ नहीं सुनना चाहता में और वहां से चला जाता है। आरती रवि की बात सुनकर चौक हो जाती है और बेड पर बैठ कर जोर जोर से रोने लगती है।
 
कुछ महीने बाद रवि आरती को पूरे घर में ढूंढ रहा होता है वो जैसे ही किचन में इंटर करता है उसे आरती वह मिलती है। वह उसे बोलता है तुम यहां हो और मैं तुम्हें पूरे घर में ढूंढ रहा हूं। आरती उससे पूछती है क्या बात है? तब  रवि उसे बोलता है भूल गई क्या आज हमें चेकअप के लिए जाना है और उसे डॉक्टर के पास ले जाता है।
 
रवि, आरती और शारदा देवी डॉक्टर के केबिन में बैठे हुए होते हैं। तब डॉक्टर नर्स को कहता है इन्हे  चेकअप के लिए ले जाइए और नर्स आरती को लेकर वहां से चली जाती है। आरती के जाते ही रवि डॉक्टर से पूछता है अगर उसे शक हो गया तो। तब डॉक्टर उसे बोलता है आप टेंशन मत लीजिए कुछ नहीं होगा।
 
थोड़ी देर बाद नर्स डॉक्टर के कमरे में आते ही डॉक्टर को रिपोर्ट देती है। डॉक्टर उसे चेक करते ही शारदा देवी से बोलता है। आपकी बहू के पेट में बेटी है। तब शारदा देवी उसे बोलती है डॉक्टर प्लीज आप कैसे भी इस बच्चे को गिरा दीजिए हमें बेटी नहीं चाहिए। रवि भी अपनी मां की तरह डॉक्टर से रिक्वेस्ट करने लगता है और यह सारी बात गेट के पीछे से छुपकर आरती सुन लेती है और वह सुनकर शौक हो जाती है और वहां से चली जाती है।
 

 

डॉ रवि को एक मेडिसिन देकर बोलता है आप बस उन्हें यह खिला दीजिएगा और आप जैसा चाहते हैं वह हो जाएगा। रवि उन्हें थैंक यू बोलकर आरती को लेने के लिए पेशंट रूम में जाता है लेकिन उसे वहां पर आरती नहीं मिलती। तब नर्स उसे बोलती है मेम तो कब की चली गई।
 
 
 
 

 

आरती अपने कमरे में रो रही होती है और सोचती है नहीं-नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगी। मैं मेरी बेटी को कुछ नहीं होने दूंगी। दूसरी तरफ रवि और शारदा देवी कार से बाहर निकलते हैं और भागते हुए सीधे आरती के कमरे की तरफ जाते हैं। रवि जोर-जोर से अपने कमरे का दरवाजा नॉक करता है। आरती क्या हुआ तुम्हें ?? तुम हॉस्पिटल से चली क्यों गई?? तब आरती उसे बोलती है- मुझे किसी से कोई बात नहीं करनी। मैं सब जानती हूं आप सब मिलकर मेरी बेटी को मारना चाहते हो। मैं ऐसा नहीं होने दूंगी। एक बात आप सब समझ लीजिए मैं मेरी बेटी को नहीं मारूंगी मेरी बेटी इस दुनिया में जरूर आएगी।
आरती की बात सुनकर शारदा देवी को गुस्सा आ जाता है और वह कुछ बोलने वाली होती है पर रवि उसे रोक देता है। और बोलता है आरती देखो तुम परेशान मत हो, तुम जैसा चाहती हो वैसा ही होगा। हमारी बेटी इस दुनिया में जरूर आएगी। शारदा देवी फिर से गुस्से में रवि को कुछ बोलने की वाली होती है पर वह उन्हें इशारे में मना कर देता है और वहां से जाने के लिए बोल देता है। वह आरती को कहता है- आरती में मां को समझा दूंगा। अब प्लीज दरवाजा खोल दो। आरती उसकी बात सुन कर अपने कमरे का दरवाजा खोलते ही रवि को गले लगा लेती है और बोलती है- प्लीज मेरी बच्ची को मत मारना। रवि उसे बोलता है कुछ नहीं होगा हमारी बेटी को तो तुम चिंता मत करो।
कुछ दिन बाद आरती किचन में खुशी-खुशी काम कर रही होती है और सोचती है। कितनी अच्छी बात है रवि ने भी हमारी बेटी को अपना लिया है। अब हम खुशी-खुशी अपनी बेटी को इस दुनिया में लेकर आएंगे, दुनिया की सारी खुशी देंगे। और अपने पेट पर हाथ रखकर बोलती है। मेरी प्यारी प्रिंसेस मैं जिंदगी भर तुम्हारी रक्षा करूंगी और तुम्हें कुछ भी नहीं होने दूंगी। इतने में वहां रवि आ जाता है। यह तुम क्या कर रही हो आरती?? मैंने तुमसे कहा है ना कि तुम कोई काम नहीं करूंगी। आरती कुछ बोलने ही वाली होती है पर रवि उसे बोलता है। तुम टेंशन मत लो आरती मां है ना वह कर लेगी। तुम बस आराम करो और मेरी प्यारी सी बिटिया का ध्यान रखो। और उसे प्यार से फल खिलाने लगता है। आरती बस उसे देखते हुए स्माइल करती रहती है।


आरती कुछ बोलने ही वाली होती है पर रवि उसे बोलता है। तुम टेंशन मत लो आरती मां है ना वह कर लेगी। तुम बस आराम करो और मेरी प्यारी सी बिटिया का ध्यान रखो। और उसे प्यार से फल खिलाने लगता है। आरती बस उसे देखते हुए स्माइल करती रहती है।

कुछ दिन ऐसे ही आरती के लाइफ में खुशी खुशी बीत जाते हैं। रवि उसकी और अपनी होने वाली बेटी कि काफी देखभाल करने लगता है। आरती यह सब देख कर मन ही मन काफी खुशी थी। उसे लगने लगा था कि रवि बदल गया है। और अब वह उससे और उसकी बेटी से बहुत ज्यादा प्यार करता है।
 
फिर एक दिन आरती कपड़े धोने के लिए लेकर जा रही थी तभी शारदा देवी उसे रोक लेती है और कहती है- आरती तुम जाकर आराम करो मैं सब काम करूंगी। तुम बस अपना और मेरी पोती का ध्यान रखो और उसके हाथों से कपड़े ले लेती है। आरती चुपचाप अपने कमरे में आराम करने के लिए चली जाती है। इधर रवि किचन में आरती के लिए गिलास में जूस निकालता है और उसमें कोई दवाई मिक्स कर देता है उसके बाद शारदा और रवि एक दूसरे को देखकर स्माइल करते हैं।
 
आरती अपने कमरे में आराम कर रही होती है और रवि रूम में आता है। उसे वही जूस का गिलास पिने को देता है। आरती उसे मना करती है कि नहीं रवि मुझे नहीं पीना पर रवि उसे जबरदस्ती पिला देता है। कमरे से बाहर आते ही रवि किसी को फोन करता है और कहता है डॉक्टर काम हो गया। मैंने उसे वह दवाई दे दी है और फिर फोन रखते हुए कहता है- अब मैं भी देखता हूं ये बच्ची कैसे इस दुनिया में आती है।
 
रवि की बात पीछे से आरती सुन लेती है और जोर से चिल्लाती है नहीं ऐसा नहीं हो सकता। वो रवि से कहती है- तुमने ऐसा क्यों किया मेरे साथ। तब रवि उसे चांटा मार देता है तुमने क्या सोचा था मैं इस मनहूस को दुनिया में आने दुगा। नहीं ऐसा कभी नहीं होगा। आरती कुछ बोलने वाली होती है पर उसे पेट में दर्द होने लग जाता है और वह बेहोश हो जाती।
 
कुछ घंटों बाद हॉस्पिटल
डॉक्टर रूम से बाहर निकलता है और रवि से कहता है आपका काम हो गया है। हमने इस बच्ची को गिरा दिया है। डॉक्टर की बात सुनकर रवि और शारदा देवी काफी खुश हो जाते हैं और एक दूसरे को गले लगा लेते हैं।

 

इधर आरती अपने पेट पर हाथ फेरती है वो जैसे ही उसको इस बात का एहसास होता है वह जोर जोर से रोने लगती है और कहती है- आज एक बार फिर से इस जालिम समाज और इसके लोगो के हाथो एक ओर मासूम बिटिया कुर्बान हो गई। आखिर कब तक ऐसा होगा। कब तक एक मासूम से उसके जीने का हक छीन लिया जायेगा। क्या कभी ऐसा कोई नया सवेरा होगा जब फिर से इस समाज में और लोगो के आँगन में एक नन्ही बिटिया के पेरो के भागने और हसने, खिलखिलाने की आवाज गूंजेगी।

 

To Be Continued……

 

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